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Sant Santaji Maharaj Jagnade
Sant Santaji Maharaj Jagnade संत संताजी महाराज जगनाडे
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राजिम माँ की औलाद हो

गर्व हमें है, हम है तेली 
निज गौरव, स्वाभिमान हैं, 
सरल सौम्य, योद्धा भी जन्मे
पावन एक पहचान हैं ।

कांतिहीन सा चेहरा छोडो
हेमूशाह फौलाद हो,
मॉ कर्मा के, आंख का तारा
राजिम मॉ की औलाद हो । 

Rajim Mata


झांको तो इतिहास तुम्हारा
कैसा स्वर्णिम राज था,
नीति धर्म के तुम संरक्षक
साहूकारी का काज था ।

तुम हो पुरोधी, वैश्य कर्म का
तेल, इत्र निर्माता हो,
श्रमशीलता का हो उदाहरण
स्वयं भाग्यविधाता हो ।

जहा बात हो राष्ट्रधर्म का
देश-भक्त, स्वाभिमानी हो 
राणा के हो, शौर्य रक्षक 
अमर (भामा) बलिदानी हो ।

राजा भोज को प्राण दान दे 
कृष्ण देव बन अमर हुए
आल्हा उदल के वीर सेनानी 
धनुवा तेली कहर किये ।

ज्ञान प्रकाश का पूंज्य बनकर
नालंदा की नींव गढे
अखिल विश्व में बौद्ध धर्म का
लेकर झंडा आगे बढे ।

धर्मात्मा थे, वैश्य तुलाधर
गर्व जाजलि का तोडा,
संत तुका के प्रिय संताजी 
बिखरे अभंगो को जोडा ।

उनकी महिमा मैं क्या गांऊ
जो गुरू गोरखनाथ हुए
महायोगी, ब्रम्हचारी बनकर
नाथों के जो नाथ हुए ।

आआ तुमको और बता दूं
क्या थे तेली आज तुम्हे 
सोये हैं, स्वाभिमान भूलकर
नही है, गौरवगान जिन्हें ।

मॉ कर्मा की अमर कहानी
किसे नही है, ज्ञात भला
प्रेम स्नेह, वात्सल्य भाव के 
बीच क्या आया जात भला ।

शुद्र समझ जिनकों थे भगाया
मद में चुर अज्ञानी थे
खिचडी खाने दौडे प्रभु जी
वो जगन्नाथ जी स्वामी थे

धन्य - धन माँ कर्मा जिनके 
प्रेम की आखिर जीत हुई,
श्रद्धा और समर्पण जीता 
निसे प्रभु प्रीत हुई ।

कमल क्षेत्र, पद्मावती पुरी
स्वयं नारायण वास जहां
राजिम तेली माता जन्मीं
उनसा भक्तिन और कहॉ ।

जिनके क्षेत्र, पद्मावती पुरी
स्वयं नारायण वास जहां
राजिम तेली माता जन्मीं
उनसा भक्ति और कहॉ ।

जिनके भक्ति के प्रभाव से
राजिम नगरी धाम बना
नारायण के नाम के पहले 
मॉ राजिम का नाम लगा ।

अब तो चिंतन करना होगा
स्वाभिमान को जगाना है
खोये गौरव गरिमा फिर से 
घर-घर फिर, लौटाना है ।

हम है भारत मॉ के बेटे 
कर्मा के संतान है
मॉ राजिम के, कोख में जन्में
भामा के पहचान हैं ।

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