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Sant Santaji Maharaj Jagnade
Sant Santaji Maharaj Jagnade संत संताजी महाराज जगनाडे
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छत्तीसगढ़ प्रदेश साहू (तेली ) संघ का इतिहास

छत्तीसगढ साहू तेली संघ का इतिहास

    अखिल भारतीय तैलिक साहू महासभा की स्थापना 24 दिसम्बर 1912 को बनारस में हुई तथा प्रतिवर्ष बैठक होती रही । राष्ट्रीयता की भावना एवं राष्ट्रीय नेताओं के सम्यक मार्ग दर्शन से प्रेरित विभिन्न जातियों भी अपनी अस्तित्व रक्षा के लिए प्रयत्नशील ही । छत्तीसगढ में भी साहू समाज से राष्ट्रीयता की मुख्य धारा में भी साहू समाज से राष्ट्रीयता की मुख्य धरा में जुडने के लिए उत्साहित रहा । इसी पप्रिेक्ष्य में संपूर्ण छत्तीसगढ में वृहत स्तर पर सर्वप्रथम 1912 में गोकुलपुर बगीचा धर्मतरी में श्री जगतराम देवान की प्ररेणा से अधिवेशन हुआ । 1914 में भी धमतरी में पुन: प्रयास किया गया । बैठक यत्रतत्र होते रहा, कहा जाता है कि छत्तीसगढ मे इसी मध्य महात्मा गांधी का अगमन 1920 में हुआ था, जिससे राष्ट्र एवं जााति प्रेम की बलवती भावना से लोगों में संगठन हेतु प्रेरणा जागी । पुनश्च 1926 में आमदी भाठा जिला दुर्ग मे एउंव सिलहट बगीचा मे विशाल सम्मेलन हुआ ।  धीरे - धीरे 1937 में छत्तीसगढ साहू संघ का स्वरूप आया था छोटी - छोटी बैठके होती ही रहती थी  । इन दिनों भी केंन्द्र राजिम भक्तिन मंदिर रहा । जहां न्याय का सर्वोच्च विधान था ।

Sahu Teli Samaj History Chhattisgarh

    ये ही छुटपुट बैठके उस क्रांतिकारी महधिवेशन का सोपान बनी जो नवंबर 1946 में माधवराव सप्रे शाला रापुर (लारी स्कुल) के विशाल प्रांगण में इस क्षेत्र में प्रथम बार अखिल भारतीय तैलिक महासभा का 18 वां अधिवेशन हुआ । विश्वस्त जानकारी है कि संपूर्ण भारत में अधिकांश स्वजातीय प्रतिनिधि सम्मिलित हुए थे  भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन का जन जागरण एवं भारत छोडो आन्दोलन को संगठत शकित का स्पष्ट परिणाम दिखाई दे रहा था । यद्यपि हमारा यह समाजिक मंच था किन्तु राष्ट्रीय स्तर के नेतृत्व वर्ग भी सम्मिलत हुए थे । माना जाता है कि लगभग दस हजार लोग इस अधिवेशन में शामिल हुए थे । शिक्षा में प्रगति कुरीतियों का विनाश वं आर्थिक स्त्रोत आदि पर महत्वपुर्ण निर्णय लिया गया था।

    ऐसा कहा जाता है कि संपूर्ण छत्तीसगढ में  इन दिनों  तक राजा परिहा एवं कुरहा प्रथा का चलन था जो कि यही संगठन का आधार था । वार्षिक सभा के समय एक पईली चांवल एक पैसा प्रति परिवार का सहयोग लेकर पूर्ण श्रद्धा एवं संगठन से प्रेरित होकर मनोयोग से लाग सामाजिक सम्मेलनों में सम्मिलित होते थे । आत्मीयता होती थी । उत्साह विश्वास बढता था । 

    अब तक क या क्षैत्र तथा तहसील स्तर पर संगठन प्रांरभ हो चुका था । इसी मध्य राजनांदगांव में संपूर्ण छत्तीसगढ का प्रथम साहू धर्मशाला का निर्माण हुआ । इसी की प्रेरणा से छत्तीसगढ साहू समाज की प्रेरणा स्त्रोत मंदिर भक्तिन राजिम के जीर्णोद्धार का कार्य भी किया गया । यहां माघ पूर्णिमा के दिन सभी जगह से साहू समाज सम्मिलित होते सामाजिक चर्चाएं होती तथा वैवाहिक बातचीत भी होती थी , यहा परम्परा निरंतर प्रचलित में है ।  1961 मैं दाऊ उत्तम साव खोपली, दुर्ग को समाज रत्न का सम्मान मिला ।

    प्रगति तीव्र गति से थी अत: श्री रामनारायण साहू दुर्ग, प्रल्हाद कुमार साहू, गोविंद प्रसाद साहू, रापुर की सकियता से 13 जून 1961 में छत्तीसगढ साहू संघ का विधिवत पंजीयन ग्वालियार से हुआ तथा पंजीयन  क्रमांक 33 मिला । क्षेत्र की यह प्रथम सामाजिक पंजीकृत संस्था बनी । अब तक इसका विस्तार छत्तीसगढ एवं दुर्ग जिले के कुछ चुने हुए कार्यकर्ता ही सक्रिय परिलक्षित हो  रहे थे । पश्चात शीतला मंदिर रासागर पारा रायुपर में नवयुवकों ने पत्रिका प्रकाशन का कार्य स्वीकार किया स्वयं प्रेस हेतु प्रोत्साहित हुए । पत्रिका का प्रारंभिक कुछ अंकों का प्रकाशन भी हुआ और अन्तत: दुर्ग से 1960 में साहू संदेश नामक मासिक पत्रिका का नियमित ्रकाशन हुआ । श्री पतराव साव संपादक बने । पत्रिका का विस्तार हुवा । इसी मध्य क्षेत्रीय स्तर पर जगह जगह संगठन क्रियाशील रहे । छत्तीसगढ नवयुवक मंडल का गठन 1967 में हुआ । नवयुवकों का यह सराहनीय प्रयास  था ।

    पुनश्च छत्तीसगढ साहू संघ की प्रेरणा से 1972 में अखिल भारतीय तैलिक महासभा का 31 वां. अधिवेशन बिलासपुर में आयेजित किया गया जहां वार्षिक चुनाव एवं कार्यकारिणी का गठन किया गया । हां पर मध्यप्रदेश साहू सभा के निर्माण हेतु पर्ण आधार तैयार किया गया था । पश्चात म.प्र. साहू सभा का गठन भी हुआ ।
    
    अब तक सामाजिक क्षेत्रों में कार्य करने के लिए राजनैतिक शक्ति अर्जन हेतु अनेक कार्यकर्ता सामने आने लगे. थै । आदर्श विवाह को पर्याप्त प्रोत्साहन दिया जा रहा था, दहेज की प्रथा तो हमारे समाज में कभी थी ही नहीं  । 1975 में मुनगासेर तथा 1976 में बागगाहरा जिला रापयुपर में 61 जोडे आदर्श विवाह संपन्न हुए जिसका दुरदर्शन द्वारा संपुर्ण भारत में प्रचार हुआ नि:संदेह किसी समाज विशेष द्वारा इस संख्या में किया जाने वाला यह प्रथम सामहिक आदर्श विवाह था । यह सभी समाज के लिए उदाहरण बना ।

    इसके पूर्व रायपुर के पदाधिकारियों ने सामाजिक पत्रिका साहू सम्पर्क का प्रकाशन मार्च 1975 में प्रारंभ कर दिया था । स्नेही प्रकाशन समिती द्वारा प्रकाशित इस पत्रिका के संपादक मण्डल में सर्व श्री . प्रल्हाद कुमार साहू, उदयराम साहू, सुखदेवराव साहू, देवकुमार साहू, बिसौहा राम   साहु  रहे । अब तो शक्ती का स्त्रोत छत्तीसगढ साहू संघ बन चुका था तथा राजनैतिक पैठ भी पर्याप्त हो चुका थी, हमारी अनेक कार्यकर्तेा राजनैतिक क्षितिज पर चमकने लगे थे, संपूर्ण मध्यप्रदेश में रायपुर एवं दुर्ग जिला साहू समाज राजनैतिक दृष्ठि से जागरूक क्षेत्र  बना । हमेशा तीन चार से अधिक विधायक निर्वाचित हुए । राजनिती में राष्ट्रीय स्तर की प्राप्ति सांसद के रूप में भी मिला ।

    इसी मध्य छत्तीसगढ साहू संघ ने समाज के निर्धन छात्रों के लिए छात्रवफत्ति हेतु प्रयास किया, जगह - जगह छात्रावास कर्मासदन निर्माण हेतु प्रोत्साहन किया । आदर्श विवाह हेतु वातावरण निर्मित किया । वहीं सम्पूर्ण छत्तीसगढ हेतु स्वीकृत सामाजिक नियमावली हेतु प्रयत्नशील रहा जो अब फलीभूत हुआ है । कर्मा जयन्ती पर उपवर्गीय अवकाश स्वीकृत कराया ।
    
    छत्तीसगढ साहू संघ द्वारा तत्कालीन अध्यक्ष के निर्देशानुसार 1981 एंव 1982 में साहू समाज में समपर्ण भाव से कार्य करने वाले  कर्मठ एवं सकिय कार्यकर्ताओं को समाज रत्न एवं समाजवीर की मदद उपाधि से विभूषित कर सन्मानित किया, विभिन्नि क्षेत्रों में समर्पित एवं कर्मठ कार्यकर्ता रहे है । 

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